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फैसला / सुप्रीम कोर्ट के कहने पर यूनीटेक का प्रबंधन केंद्र ने अपने हाथ में लिया, 12 हजार घर खरीदारों को राहत की उम्मीद

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नई दिल्ली. रिएलिटी फर्म यूनीटेक का प्रबंधन सरकार अपने हाथ में लेगी। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को सरकार के इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। जस्टिस डी वाय चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली बेंच ने 2 महीने में यूनीटेक का नया बोर्ड गठित कर समाधान योजना बनाने के लिए कहा है। समाधान प्रक्रिया की निगरानी के लिए सुप्रीम कोर्ट के रिटायर जज की नियुक्ति की जाएगी। इससे 12 हजार घर खरीदारों को राहत की उम्मीद है। सरकार अपनी तरफ से पैसा नहीं लगाएगी।

10 साल में यह तीसरी संकटग्रस्त कंपनी है, जिसे संभालने के लिए सरकार ने नियंत्रण अपने हाथ में लिया है। इससे पहले 2009 में सत्यम कम्प्यूटर्स और 2019 में आईएल एंड एफएस का मैनेजमेंट सरकार ने अपने हाथ में लिया था।

यूनीटेक के फाउंडर रमेश चंद्रा को नए बोर्ड का सदस्य बनाने से इनकार
सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा कैडर के रिटायर्ड आईएएस यदुवीर सिंह मलिक का नाम चेयरमैन और बोर्ड के मैनेजिंड डायरेक्टर के तौर पर मंजूर किया है। अदालत ने यूनीटेक के फाउंडर रमेश चंद्रा को बोर्ड मेंबर नियुक्त किए जाने से इनकार कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मौके पर यह उचित नहीं होगा। सुप्रीम कोर्ट ने बोर्ड मेंबर के तौर पर एनबीसीसी के पूर्व सीएमडी एके मित्तल, एचडीएफसी क्रेडिला फाइनेंस सर्विस की चेयरमैन रेनू सूद कर्नाड, एम्बेसी ग्रुप के सीएमडी जीतू वीरवानी और हीरानंदानी ग्रुप के मैनेजिंग डायरेक्टर निरंजन हीरानंदानी के नामों को मंजूरी दी।

चीजें सही हो जाएंगी, तो निगरानी खत्म कर देंगे- सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा- प्रोफेशनल बोर्ड बनाने का विचार इसलिए लिया गया ताकि वे कंपनी का नियंत्रण अपने हाथ में ले सकें और घर खरीदरों के हितों को देखते हुए रुके हुए प्रोजेक्ट को पूरा कर सकें। एक बार जब सारी चीजें सही तरह से होने लगेंगी, उसके बाद हम यूनीटेक मामले पर नजर रखना छोड़ देंगे। 

यूनीटेक के प्रमोटर संजय चंद्रा पर ग्राहकों की रकम में हेर-फेर का आरोप

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि वह यूनीटेक का मैनेजमेंट संभालने के लिए तैयार है। इसके तहत मौजूदा प्रबंधन को भंग कर 10 सदस्यीय नया बोर्ड गठित किया जाएगा। पिछले महीने की 18 तारीख को सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से पूछा था कि क्या वह 2017 के प्रस्ताव पर फिर से विचार करने के लिए तैयार है, क्योंकि यूनीटेक के प्रोजेक्ट की जिम्मेदारी किसी विशेष एजेंसी को दिए जाने की तुरंत जरूरत है, ताकि तय समय पर पूरे हो सकें। यूनीटेक के प्रमोटर संजय चंद्रा तिहाड़ जेल में हैं। उन पर ग्राहकों के पैसे का हेर-फेर करने का आरोप है।

7800 करोड़ की धोखाधड़ी के बाद सत्यम कम्प्यूटर्स को केंद्र ने संभाला था
2009 में यूपीए सरकार ने सत्यम कंप्यूटर्स को बचाने के लिए उसका कंट्रोल अपने हाथ में लिया था। सत्यम के चेयरमैन बी रामालिंगा राजू ने अकाउंटिंग में 7,800 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी की थी। बाद में टेक महिंद्रा ने इसका अधिग्रहण कर लिया था। अक्बूटर 2019 में सरकार ने इंफ्रा सेक्टर के नामी ग्रुप आईएल एंड एफएस का मैनेजमेंट अपने हाथ में लिया था। 90 हजार करोड़ रुपए का कर्ज होने की वजह से कंपनी डूबने की कगार पर पहुंच गई थी। 

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