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कोरोनावायरस / अमेरिकी वैज्ञानिकों की रिसर्च: मौसम जितना ज्यादा गर्म और हवा में जितनी ज्यादा नमी होगी, संक्रमण उतना ही कम फैलेगा

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  • अमेरिका के मैसाच्युसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के वैज्ञानिकों का अध्ययन
  • दुनियाभर से संक्रमण के डाटा की तापमान और नमी के पैरामीटर पर तुलना की गई
Mar 27, 2020, 03:29 PM IST

बोस्टन. दुनियाभर में कोरोनावायरस पर तापमान के असर को लेकर डॉक्टरों और विशेषज्ञों ने कई दावे किए हैं। अब अमेरिका की मैसाच्युसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एमआईटी) के वैज्ञानिकों ने बताया है कि मौसम जितना ज्यादा गर्म होगा और हवा में जितनी ज्यादा नमी होगी, संक्रमण उतना ही कम फैलेगा। इस दावे के अनुसार जिन देशों में नमी ज्यादा है, अभी तक वहां वायरस का संक्रमण कम फैला है।

वैज्ञानिकों ने दुनिया के कई हिस्सों से कोरोना संक्रमण का डेटा इकट्‌ठा कर उसकी दो पैरामीटर- तापमान और नमी से तुलना की। इससे पता चला कि वायरस का 90% संक्रमण 3 से 17 डिग्री सेल्सियस के बीच के तापमान वाले क्षेत्रों (स्पेन, इटली, ब्रिटेन आदि) में हुआ। इन क्षेत्रों में 4 से 9 g/m3 (ग्राम प्रति मीटर क्यूब) नमी थी। मतलब एक घन मीटर हवा में 4 से 9 ग्राम पानी मौजूद है। एमआईटी के वैज्ञानिकों के अनुसार, ऐसे देश जहां पर तापमान 18 डिग्री सेल्सियस और नमी 9 g/m3 से ज्यादा है, वहां पर संक्रमण के 6% मामले कम आए हैं।

नमी इस तरह संक्रमण को फैलने से रोकती है

वैज्ञानिकों ने बताया कि जब कोरोनावायरस से संक्रमित कोई व्यक्ति खांसता या छींकता है तो उसके थूक के बेहद बारीक कण हवा में फैल जाते हैं। इन्हीं कणों के जरिए संक्रमण फैलता है। व्यक्ति के छींकने पर एक वक्त पर थूक के 3,000 से अधिक कण निकलते हैं। नमी होने पर हवा संघनित होती है और ऐसे में उसमें किसी की वायरस या बैक्टीरिया का संचरण बहुत दूर तक नहीं हो पाता है। उदाहरण के तौर पर ऐसे समझिए- एक कमरे में हवा है और उसमें नमी नहीं है। ऐसे में हवा हल्की हो जाएगी। यदि हवा में वाष्प शामिल हो जाएगी तो उसमें नमी आ जाएगी, ऐसे में वह भारी हो जाएगी। हल्की हवा में कोई भी वायरस या बैक्टीरिया दूर तक पहुंचता है। वहीं, भारी हवा में यह एक सीमा से आगे नहीं बढ़ पाता है।

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