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पुण्यार्क सूर्य मंदिर में छठ पूजा:मगध के 5 सूर्य मंदिरों में पटना का पुण्यार्क सबसे श्रेष्ठ, इसे भगवान कृष्ण के बेटे ने बनवाया था

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बिहार का महापर्व छठ सूर्य की उपासना का भी पर्व है। बिहार के मगध क्षेत्र में कई बेहद प्राचीन सूर्य मंदिर हैं। इनके स्थापना की कहानी भी बहुत रोचक है। इन मंदिरों में सबसे खास पटना जिले के पंडारक में स्थित पुण्यार्क मंदिर है। दरअसल, यह एकमात्र सूर्य मंदिर है जो, गंगा के तट पर। छठ पर यहां दूर-दूर से हजारों भक्त पहुंचते हैं। यहां ‘पुण्यार्क सूर्य महोत्सव’ भी किया जाता है। मान्यता है कि पुण्यार्क मंदिर में छठ पूजा करने से चर्म रोग दूर होता है।

मंदिर की स्थापना की कहानी क्या है

मान्यताओं के अनुसार इस मंदिर की स्थापना भगवान श्रीकृष्ण और उनकी एक पटरानी जांबवंती के पुत्र साम्ब ने की थी। ऐसा उन्होंने एक श्राप से छुटकारा पाने के लिए किया था। कहानी ये है कि श्रीकृष्ण की पटरानी जांबवंती बहुत सुंदर थी, इसलिए उनसे हुए पुत्र साम्ब भी अति सुंदर थे और इस बात का उन्हें घमंड हो गया। इसी घमंड में साम्ब ने देवर्षि नारद का अपमान कर दिया था।

नारद ने अपने अपमान का बदला लेने के उद्देश्य से श्रीकृष्ण को यह झूठी बात बताई कि साम्ब का उनकी गोपियों के साथ प्रेम संबंध है। नारद ने धोखे से साम्ब को गोपियों के साथ जल क्रीड़ा करने के लिए भेज दिया और कृष्ण को यह दृश्य दिखा भी दिया। इसी से क्रोधित हुए कृष्ण ने साम्ब को श्राप दिया, जिसकी वजह से उन्हें कुष्ठ रोग हुआ और सौंदर्य नष्ट हो गया।

कुष्ठ रोग खत्म करने के लिए मिला उपाय

साम्ब ने बाद में जब नारद से क्षमा याचना की तो उन्होंने रोग खत्म करने का उपाय बताया। इसके लिए उन्हें बारह सालों तक सूर्य की उपासना करनी थी और बारह स्थानों पर सूर्य मंदिर की स्थापना करनी थी।

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