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ग्रांट स्कीम / रिसर्च को बढ़ावा देने एआईसीटीई छात्रों और फैकल्टी को देगा ग्रांट

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एजुकेशन डेस्क. क्वालिटी रिसर्च के लिए फैकल्टी या छात्रों को आर्थिक परेशानी का सामना न करना पड़े, इसके लिए ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन (एआईसीटीई) ने रिसर्च ग्रांट स्कीम लॉन्च की है। इसका फायदा इंदौर के 38 इंजीनियरिंग कॉलेजों में पढ़ रहे 62 हजार से ज्यादा छात्रों और 1200 से ज्यादा फैकल्टी को मिलेगा। इसके लिए सालभर ऑनलाइन आवेदन किए जा सकते हैं। एआईसीटीई की इस स्कीम के बाद इंटरनेशनल लेवल की रिसर्च को बढ़ावा मिलेगा, क्योंकि चारों ही स्कीम इंटरनेशनल लेवल की रिसर्च से जुड़ी हैं। बीटेक, एमटेक, बीई और एमई सहित एआईसीटीई के दायरे में आने वाले कोर्स के छात्रों और फैकल्टी को इसका फायदा मिलेगा।

फैकल्टी विदेश जाएंगी तो मिलेंगे डेढ़ लाख
पहली स्कीम इंजीनियरिंग कॉलेजों में पढ़ाने वाली फैकल्टी के लिए हैं जो फैकल्टी रिसर्च में अच्छा काम कर रही है और उन्हें रिसर्च पेपर प्रेजेंटेशन के लिए किसी भी अन्य देश से बुलावा आता है तो इसके लिए डेढ़ लाख की ग्रांट मिलेगी, ताकि रिसर्च के लिए फैकल्टी को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रतिभा दिखाने का मौका मिले।

छात्र विदेश जाएंगे तो मिलेंगे एक लाख रुपए
दूसरी ग्रांट छात्रों के लिए रहेगी। किसी भी इंजीनियरिंग कोर्स का कोई छात्र अगर किसी अन्य देश में रिसर्च पेपर प्रेजेंटेशन के लिए बुलाया जाता है तो उसे भी एक लाख की ग्रांट मिलेगी। यह स्कीम इसलिए भी अहम है, क्योंकि कई देशों में इंजीनियरिंग से जुड़े वर्कशॉप, सेमिनार होते हैं, जिनमें ज्यादातर छात्र आर्थिक और तकनीकी कारणों से शामिल नहीं हो पाते।

अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस के लिए दिए जाएंगे 5 लाख
तीसरी स्कीम अहम है। अभी इंजीनियरिंग कॉलेजों में नेशनल लेवल की कॉन्फ्रेंस तो होती है, लेकिन सामान्य तौर पर इंटरनेशनल लेवल की कॉन्फ्रेंस या सेमिनार नहीं होते। अब इसके लिए भी संबंधित संस्थान को 5 लाख की ग्रांट मिलेगी, ताकि विदेशी फैकल्टी या छात्र यहां आएं। इससे मध्यम स्तर के इंजीनियरिंग कॉलेजों में रिसर्च की समझ बढ़ेगी।

छात्रों के ग्रुप को विदेश जाने पर मिलेंगे 10 लाख
चौथी स्कीम में छात्रों के ग्रुप को रिसर्च पेपर प्रेजेंटेशन के लिए विदेश जाने पर 10 लाख तक मिलेंगे। 2 से 10 छात्र जाएंगे तो हर छात्र को एक-एक लाख की ग्रांट मिलेगी, जबकि 10 से ज्यादा छात्र होने पर भी ग्रांट अधिकतम 10 लाख रहेगी। शिक्षाविदों का कहना है कि इससे क्वालिटी रिसर्च को लेकर स्पर्धा बढ़ेगी, यहां की रिसर्च को दुनिया के सामने लाने का मौका मिलेगा।

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